सावित्रीबाई फुले के अनमोल विचार | Savitribai Phule Quotes in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम लेकर आए हैं। एक ऐसे महापुरुष के अनमोल विचार Savitribai Phule Quotes in Hindi | सावित्रीबाई फुले के अनमोल विचार जिन्होंने देश और समाज में अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से देश और दुनिया को प्रेरित किया और समाज को एक नई दिशा दी। अनेकों कठिनाइयों के बावजुद समाज और देश में फैले कुरीतियों को दूर करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। इनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक माने जाते हैं। तो चलिए आपको इनके विचारों से रूबरू कराते हैं। जिन्हें पढ़कर आप सदा प्रेरणा प्राप्त करेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं।

THIS POST INCLUDES:–

  • सावित्रीबाई फुले – संक्षिप्त परिचय
  • सावित्रीबाई फुले के अनमोल विचार | Savitribai Phule Quotes in Hindi 
  • सावित्रीबाई फुले की कविता | Savitribai Phule Poem in Hindi
  • Frequently Asked Questions (FAQS)
  • ये भी पढ़ें – अन्य संबंधित सुविचार

सावित्रीबाई फुले – संक्षिप्त परिचय

  • जन्म - 3 जनवरी 1831, नायगांव, जिला सतारा, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत (अब महाराष्ट्र, भारत)
  • माता-पिता - लक्ष्मीबाई - खन्दोजी नैवेसे पाटिल
  • विवाह - महात्मा ज्योतिबा फुले, उम्र - 9-10 साल, 1841 में
  • संतान - यशवंत फुले (दत्तक पुत्र)
  • व्यक्तित्व - सामाजिक कार्यकर्ता, समाज सुधारक, कवयित्री, शिक्षाविद, शिक्षिका
  • गुरु ,संरक्षक और समर्थक - महात्मा ज्योतिराव फुले
  • प्रसिद्धि - आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत, मराठी काव्य की आदिकवयित्री
  • लिखित साहित्य - काव्य फुले (1854), भवन काशी सुबोध रत्नाकर (1892)
  • प्रमुख योगदान - पहली महिला शिक्षिका, बालिका विद्यालय की पहली प्रधान अध्यापिका और पहले किसान स्कूल की संस्थापक, सती प्रथा का विरोध करना, विधवा विवाह करवाना, अस्पृश्यता का विरोध करना, महिलाओं की मुक्ति और महिलाओं को शिक्षित बनाना, सामाजिक सुधार आंदोलन में महात्मा ज्योतिराव फुले की सहयोगी।
  • संगठन - सत्यशोधक समाज
  • प्रमुख कथन - जाओ, जाकर शिक्षा ग्रहण करो।
  • निधन - रात 9 बजे, 10 मार्च 1897 (उम्र 66) पुणे, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत (अब महाराष्ट्र, भारत) 
  • निधन - प्लेग महामारी से


सावित्रीबाई फुले के अनमोल विचार
Savitribai Phule Quotes in Hindi
  1. शिक्षा स्वर्ग का द्वार खोलती है, खुद को जानने का अवसर देती है।
  2. शिक्षा महान समतुल्य है, और यह हमें हमारी गुफाओं से बाहर निकालेगी।
  3. किसी और को शिक्षित करने से पहले आपको खुद को शिक्षित करना चाहिए।
  4. जितना अधिक आप जानते हैं, आपके डरने की संभावना उतनी ही कम होगी। इसलिए हमेशा जानने के लिए स्वयं प्रयास करो।
  5. समाज तथा देश की प्रगति तब तक नहीं हो सकती। जब तक कि वहां कि महिलाएं शिक्षित ना हो।
  6. मेहनत करके स्वावलंबन को अपनाओ। ज्ञान और धन को हासिल करने के लिए मेहनत करो। ज्ञान के जीवन हमारा पशु के समान है। बेवजह बैठे न रहो। विद्या ग्रहण करने के लिए आगे बढ़ो। अच्छा अवसर है, अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त कर अपने दुखों को दूर करो।
  7. शिक्षा, हर महिला की मुक्ति की कुंजी है। इसलिए शिक्षा हासिल करो।
  8. महिलाएं, देश की असली शक्ति हैं। महिलाओं को मजबूत बनाना हमारा कर्तव्य है। नारी को सामाजिक जीवन में समानता और सम्मान मिलना चाहिए।
  9. कोई तुम्हें कमजोर समझे। इससे पहले तुम्हे शिक्षा के महत्व को समझना होगा।
  10. मैं अपनी बहनों को पढ़ाने का काम करती हूं। इसलिए जो पत्थर और गोबर मुझ पर फेंके जाते हैं। वे मुझे फूल की तरह लगते हैं।
  11. स्वाभिमान से जीने के लिए पढ़ाई करो, शिक्षा ही इंसानों का सच्चा आभूषण है।
  12. अज्ञानता को तुम धर दबोचो, मज़बूती से पकड़कर पीटो और उसे अपने जीवन से भगा दो।
  13. स्त्रियां सिर्फ रसोई और खेत पर काम करने के लिए नहीं बनी है। वह पुरुषों से बेहतर कार्य कर सकती है।
  14. देश में महिला साक्षरता की भारी कमी है क्योंकि यहां की महिलाओं को कभी बंधन मुक्त होने ही नहीं दिया गया।
  15. महिलाओं को समान अधिकारों का अधिकार है, उन्हें खुद को विकसित करने का मौका दें।
  16. चौका बर्तन से ज्यादा जरूरी है पढ़ाई! क्या तुम्हें मेरी बात समझ में आई?
  17. महिलाओं को गुलामी से बचाएं। महिला आज़ाद हो तो समाज आज़ाद होगा। समाज आज़ाद होगा तो देश आगे बढ़ेगा, उन्नति करेगा।
  18. महिला शिक्षा ही वो सर्वश्रेष्ठ चांदनी है, जो समाज को उज्ज्वलता और सशक्ति का आधार प्रदान करती है।
  19. अपनी बेटी के विवाह से पहले उसे शिक्षित बनाओ, ताकि वह आसानी से अच्छे-बुरे का फर्क कर सके।
  20. किसी समाज या देश की प्रगति तब तक असंभव हैं, जब तक वहां की महिलाएं शिक्षित ना हों।
  21. जुबान पर महिला नीचापन नहीं सह सकती। महिलाओं की गरिमा को बचा कर रखें।
  22. महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए उन्हें एक समर्पित प्रशिक्षण और सुरक्षित माहौल प्रदान करें।
  23. बेटियों को भी शिक्षा और स्वावलंबी बनने का मौका दें, वे भी अपने सपनों को पूरा करेंगी। ताकि वे भी समाज की उन्नति में सहायक बन सकें।
  24. आखिर कब तक तुम अपने ऊपर हो रहे अत्याचार को सहन करोगी? देश बदल रहा है, इस बदलाव में हमें भी बदलना होगा। शिक्षा का द्वार जो पितृसत्तात्मक विचार ने बंद किया है, उसे खोलना होगा।
  25. जाओ, जाकर पढ़ो-लिखो। मेहनती बनो। आत्मनिर्भर होकर काम करो। ज्ञान और धन एकत्रित करो। ज्ञान के बिना सब खो जाता है। ज्ञान के बिना हम जानवर बन जाते है। इसलिए खाली मत बैठो। जाओ जाकर शिक्षा ग्रहण करो।
  26. एक सशक्त और शिक्षित स्त्री सभ्य समाज का निर्माण कर सकती है। इसलिए तुम्हारा भी शिक्षा का अधिकार होना चहिए। कब तक तुम गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी रहोगी? उठो और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करो।
  27. महिलाएं शक्ति की मूर्ति हैं, जिन्हें बल में संकोच नहीं करना चाहिए।
  28. गरीबों और जरूरतमंदों के लिए हितकारी और कल्याणकारी कार्य शुरू किए हैं। मैं अपने हिस्से की जिम्मेदारी भी निभाना चाहती हूं। मैं आपको यकीन दिलाती हूं कि मैं आपकी हमेशा सहायता करुँगी। मैं कामना करती हूं कि ये कार्य अधिक लोगों की सहायता करेंगे।
  29. मेरी कविता को पढ़ सुनकर यदि थोड़ा भी ज्ञान प्राप्त हो जाए। तो मैं समझूंगी मेरी परिश्रम सार्थक हो गया। मुझे बताओ, सत्य निडर होकर की कैसी है मेरी कविताएं? ज्ञान परख यथार्थ मनभावन या अद्भुत, तुम ही बताओ।
  30. हमारे शिक्षाविदों ने स्त्री शिक्षा को लेकर अधिक विश्वास नहीं दिखाया। जबकि हमारा इतिहास बताता है, पूर्व समय में महिलाएं भी विदुषी थी।
  31. यदि आप सोचना सीखना चाहते हैं तो किताबें पढ़ें। यदि आप सीखना चाहते हैं कि अभिनय कैसे किया जाता है? तो अभिनय देखें।
  32. महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए उन्हें एक समर्पित प्रशिक्षण और सुरक्षित माहौल प्रदान करें।
  33. हमें खुद को साबित करना होगा अन्याय, दासता से ऊपर उठना होगा। पितृसत्तात्मक समाज यह कभी नहीं चाहेगा कि स्त्रियां उनकी बराबरी करें।
  34. शिक्षा आपके दिमाग को खोलने की कुंजी है, और यह आपको अपने जीवन में कुछ करने के लिए सशक्त बनाती है।
  35. महिलाएं समाज के सिलसिले में पारंपरिक भूमिकाओं से अधिक कर सकती हैं।
  36. जो स्त्री अपने मन की होती है। उसका पति अयोग्य होता है।
  37. समान शिक्षा, महिला के प्रति समानता और समरसता की ओर अग्रसर होने का मार्ग है।
  38. महिलाएं समाज के सिलसिले में पारंपरिक भूमिकाओं से अधिक कर सकती हैं।

सावित्रीबाई फुले की कविता | Savitribai Phule Poem in Hindi

सुनहरे दिन का उदय हुआ
आओ प्यारे बच्चों आज
हर्ष उल्लास से तुम्हारा
स्वागत करती हूं आज
काम जो आज करना है, उसे करें तत्काल
दोपहर में जो कार्य करना है, उसे अभी कर लो
पल भर के बाद का सारा कार्य इसी पल कर लो
काम पूरा हुआ या नहीं
न पूछे मौत आने से पूर्व कभी

चौका बर्तन से, बहुत जरूरी है पढ़ाई,
क्या तुम्हें, मेरी बात समझ में आई?

तितली आकाश में उड़ रही है अपने सुंदर पंख लिए-
तितलियां रंग-बिरंगी मन भावन
उनकी आंखे दिलकश सतरंगी, हंसमुख
पंख मुड़े, किन्तु भरे उड़ान आकाश में
उनका रंग रूप मनभावन
तितली की मनभावन अदा को देख एक कली अपने पास बुलाने की भूल कर बैठी
उड़कर पहुंची तितलियां फूलों के पास
इकट्ठा कर शहद पी डाला
मुरझा गई कलियां
इसमें चमेली के फूल पर लिखा है-
फूलों कलियों का रस चखकर
ढूंढा कहीं ओर ठिकाना
रीत है यही दुनिया की
जरूरत और पल भर के हैं रिश्ते-नाते
देख दुनिया की रीत हो जाती चकित
विद्या ही सर्वश्रेष्ठ धन है
सभी धन-दौलत से
जिसके पास है ज्ञान का भंडार
है वो ज्ञानी जनता की नज़रो में
चलो चलें पाठशाला हमें है पढ़ना
नहीं अब वक्त गंवाना है
ज्ञान विद्या प्राप्त करें चलो अब संकल्प करें
मूढ़ अज्ञानता, गरीबी गुलामी की जंजीरों को
चलो खत्म करें
गुलाब का फूल और फूल कनेर का
रंग रूप दोनों का एक सा
एक आम आदमी, दूसरा राजकुमार
गुलाब की रौनक, देसी फूलों से उसकी उपमा कैसी
हल्दी रंग की, पीली चम्पा
बाग में खिली, हृदय के भीतर तक बस गई
पता न चला, मन में कब घर कर गई?

Frequently Asked Questions (FAQS)

  • सावित्रीबाई फुले का जन्म कहां हुआ था?
  • इनका जन्म 3 जनवरी 1831 को नायगांव, जिला सतारा, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत (अब महाराष्ट्र, भारत) में हुआ था।
  • आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत या मराठी काव्य की आदिकवयित्री किन्हें कहा जाता है?
  • सावित्रीबाई फुले को आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत या मराठी काव्य की आदिकवयित्री कहा जाता है।
  • सावित्रीबाई फुले ने कौन-कौन से कार्य किए?
  • सावित्रीबाई फुले और उनके पति ने 1848 में भिड़ेवाड़ा, पुणे में भारत का पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया। उन्होंने जाति और लिंग के आधार पर लोगों के साथ होने वाले भेदभाव और अनुचित व्यवहार को खत्म करने के लिए काम किया। भारत की पहली महिला शिक्षिका, बालिका विद्यालय की पहली प्रधान अध्यापिका और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थी। सती प्रथा का विरोध करना, विधवा विवाह करवाना, अस्पृश्यता का विरोध करना, महिलाओं की मुक्ति और महिलाओं को शिक्षित बनाना, सामाजिक सुधार आंदोलन में महात्मा ज्योतिराव फुले की सहयोगी रही।
  • भारत में लड़कियों का पहला स्कूल किसने शुरू किया था?
  • प्रतिष्ठित महात्मा ज्योतिराव फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई ने 1848 में पुणे के भिड़ेवाड़ा में भारत का पहला लड़कियों का स्कूल खोला और इतिहास रचा। उन्होंने कुल 18 स्कूल खोले।
  • भारत की पहली महिला शिक्षिका कौन है?
  • देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले थीं।इनका जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र राज्य के सतारा जिले के नायगांव में हुआ था।
  • सावित्रीबाई फुले का निधन कब हुआ था?
  • सावित्रीबाई फुले का निधन रात 9 बजे, 10 मार्च 1897 को 66 वर्ष की आयु में पुणे, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत (अब महाराष्ट्र, भारत) में प्लेग महामारी से हुआ था।

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